बुधवार, 13 अगस्त 2025

डायलिसिस से बचने का तरीका क्या है ?

 डायलिसिस से बचने के लिए आपको अपनी किडनी की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। किडनी की बीमारी आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन अगर सही समय पर इलाज और ध्यान दिया जाए, तो डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ती। यहां कुछ मुख्य तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप डायलिसिस से बच सकते हैं:


1. स्वस्थ आहार (Healthy Diet)

  • कम सोडियम: नमक का सेवन कम करें, क्योंकि ज्यादा नमक किडनी पर दबाव डालता है।

  • प्रोटीन का सीमित सेवन: अधिक प्रोटीन भी किडनी पर दबाव डाल सकता है, खासकर अगर किडनी की कार्यक्षमता कम हो।

  • फल और सब्जियाँ: ताजे फल और सब्जियाँ खाएं, जो पोषक तत्वों से भरपूर हों और किडनी के लिए फायदेमंद हों।

2. पर्याप्त पानी पिएं (Stay Hydrated)

  • पर्याप्त पानी पीना किडनी के लिए अच्छा है, लेकिन यदि आपको किडनी की बीमारी है तो पानी की मात्रा के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।

3. ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) कंट्रोल करें

  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) किडनी को नुकसान पहुंचाता है। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक करें और उसे सामान्य रखने के लिए दवाएं लें, अगर आवश्यक हो।

4. शुगर (Diabetes) को कंट्रोल करें

  • अगर आपको डायबिटीज़ है तो अपनी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें, क्योंकि लंबे समय तक उच्च शुगर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।

5. नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

  • नियमित रूप से हलका व्यायाम जैसे तेज चलना या योग करना रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे किडनी का काम बेहतर होता है।

6. दवाइयों का सही उपयोग (Proper Use of Medications)

  • बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनमें से कुछ दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं (जैसे ibuprofen और naproxen)।

7. स्वास्थ्य की नियमित जांच (Regular Health Check-ups)

  • अगर आपको डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां हैं, तो नियमित जांच करवाएं ताकि किडनी की कार्यक्षमता की निगरानी की जा सके। अगर कोई समस्या है, तो जल्दी इलाज किया जा सकता है।

8. धूम्रपान और शराब से बचें (Avoid Smoking and Alcohol)

  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब पीना किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।

9. मोटापे से बचें (Avoid Obesity)

  • अधिक वजन भी किडनी पर दबाव डालता है। स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और व्यायाम का पालन करें।


अगर आपको पहले से ही किडनी की बीमारी का खतरा है या कोई लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना और उचित इलाज शुरू करना महत्वपूर्ण है। समय पर इलाज से किडनी के कार्य में गिरावट को रोका जा सकता है और डायलिसिस की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

किडनी फ़ेल होने के मामले में, डायलिसिस एक लाइफ़-सेविंग ट्रीटमेंट है. हालांकि, कुछ लोग लंबे समय तक डायलिसिस नहीं करवाना चाहते और किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पसंद कर सकते हैं. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ट्रांसप्लांट के इंतज़ार के दौरान डायलिसिस की आवश्यकता पड़ सकती है. 

शनिवार, 12 जुलाई 2025

किडनी खराब होने का पहला संकेत क्या है?

 किडनी खराब होने का पहला संकेत आमतौर पर पेशाब में बदलाव होता है। इसमें पेशाब की मात्रा, रंग, या आवृत्ति में परिवर्तन शामिल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, थकान, सूजन, खुजली, और उल्टी जैसे लक्षण भी किडनी खराब होने का संकेत दे सकते हैं


किडनी (गुर्दा) खराब होने का पहला संकेत अक्सर बहुत सामान्य और हल्के होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शुरुआती चरण में पहचान कर ली जाए तो इलाज आसान हो सकता है। किडनी खराब होने के पहले संकेतों में शामिल हैं:

किडनी खराब होने के पहले सामान्य संकेत:

  1. बार-बार पेशाब आना या पेशाब में कमी आना
    – खासकर रात में बार-बार पेशाब लगना।
    – या फिर पेशाब की मात्रा कम हो जाना।

  2. पेशाब में झाग या खून आना
    – झागदार पेशाब प्रोटीन लीक होने का संकेत हो सकता है।
    – खून आना संक्रमण या किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है।

  3. शरीर में सूजन आना (सूजन खासकर पैरों, टखनों, चेहरे पर)
    – किडनी अगर सही से काम नहीं कर रही हो तो शरीर में तरल रुक जाता है।

  4. थकान और कमजोरी
    – किडनी की खराबी से शरीर में विषैले पदार्थ (toxins) जमा हो जाते हैं, जिससे थकान होती है।

  5. भूख कम लगना और उल्टी जैसा महसूस होना
    – टॉक्सिन के जमा होने से पेट की गड़बड़ी महसूस हो सकती है।

  6. त्वचा में खुजली और रूखापन
    – यह मिनरल असंतुलन या वेस्ट जमा होने का संकेत हो सकता है।

  7. सांस लेने में कठिनाई
    – अगर शरीर में फ्लूइड जमा हो जाए या खून में ऑक्सीजन कम हो जाए तो ऐसा होता है।

  8. ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या नींद की समस्या
    – यह भी विषाक्त पदार्थों के कारण हो सकता है।



कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि आपको ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण लगातार दिख रहे हैं, खासकर यदि आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, या फैमिली हिस्ट्री है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और किडनी की जांच कराएं (जैसे – क्रिएटिनिन टेस्ट, यूरिन टेस्ट, GFR टेस्ट आदि)।


बुधवार, 25 जून 2025

अपनी किडनी को डिटॉक्स करने का सबसे तेज़ तरीका क्या है?

 हमारा शरीर कई तरह के टॉक्सिन्स को फिल्टर और बाहर निकालने का काम करता है, जिसमें सबसे अहम भूमिका किडनी निभाती है। किडनी हमारे खून को साफ करने के अलावा, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और वेस्ट प्रोडक्ट्स को बाहर निकालने में मदद करती है। लेकिन खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और कम पानी पीने की आदत किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। किडनी से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए हेल्दी डाइट लेना जरूरी है। ऐसे कई सुपरफूड्स हैं, जो किडनी को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं और उसे हेल्दी बनाए रखते हैं। इनमें कुछ फूड्स किडनी से अतिरिक्त वेस्ट निकालने में मदद करते हैं, तो कुछ फूड्स ब्लड प्रेशर कंट्रोल और इंफ्लेमेशन कम करने में मदद करते हैं। खास बात यह है कि किडनी को डिटॉक्स करने के लिए आपको कोई खास दवा या सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत नहीं होती, बल्कि आपकी रोजमर्रा की डाइट में मौजूद कुछ सुपरफूड्स ही आपकी किडनी को हेल्दी बनाए रख सकते हैं।  क‍िडनी की सेहत के प्रत‍ि लोगों को जागरूक करने के ल‍िए हर साल 13 मार्च को वर्ल्ड क‍िडनी डे मनाया जाता है।


किडनी का प्राकृतिक रूप से साफ रहना शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि ये शरीर से टॉक्सिक पदार्थों और एक्स्ट्रा लिक्विड को बाहर निकालती है, जिससे ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और शरीर के अन्य बेहद महत्वपूर्ण फंक्शन सही तरीके से चलते रहते हैं। अगर किडनी साफ नहीं रहती, तो हमारे शरीर में टॉक्सिक पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे किडनी स्टोन, किडनी इन्फेक्शन और किडनी फेलियर जैसी समस्याएं हो पैदा हो सकती हैं।

ऐसे में किडनी को साफ और हेल्दी बनाए रखने के लिए इनकी प्राकृतिक रूप से सफाई पर ध्यान देना जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाता है। इसके लिए कुछ फल (Fruits To Cleanse Kidneys) ऐसे हैं जो आपकी किडनी को नेचुरल रूप से साफ और तंदुरुस्त बनाए रखने में मददगार हो सकतें हैं। आइए जानते हैं इन फलों के बारे में। 

किडनी को डिटॉक्स करने के लिए फल

क्रैनबेरी- क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) को रोकने में सहायक है, जो किडनी को प्रभावित कर सकती है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स किडनी को इंफेक्शन से बचाते हैं और किडनी की सफाई में मददगार होते हैं।

ब्लूबेरी- ब्लूबेरी में एंथोसायनिन पाया जाता है, जो एंटीऑक्सीडेंट का एक बेहतरीन स्रोत है। यह किडनी में सूजन को कम करता है और टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

स्ट्रॉबेरी- स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो किडनी की सेहत को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही यह यूरीन उत्पादन को बढ़ावा देकर किडनी की सफाई को आसान बनाती है।

तरबूज- तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने और किडनी से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है।

सेब- सेब में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर में टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह किडनी के लिए बेहतरीन होता है।

अनन्नास- अनन्नास में ब्रोमेलिन नामक एंजाइम होता है जो सूजन को कम करता है और किडनी की काम करने की क्षमका को बनाए रखता है।

नींबू- साइट्रिक एसिड से भरपूर नींबू का रस किडनी स्टोन बनने की संभावना को कम करता है।

संतरा- संतरा विटामिन सी और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है, जो किडनी के कार्यों में सहायक है और टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालता है।

अनार- अनार में एंटी ऑक्सीडेंट्स और पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है,जो किडनी टॉक्सिन्स को निकालने में मदद करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारते हैं।

नींबू पानी -नींबू पानी किडनी को डिटॉक्स करने का सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका है। इसमें सिट्रिक एसिड होता है, जो किडनी में स्टोन बनने से रोकता है और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है। रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से किडनी को नेचुरल डिटॉक्स मिलता है।



आपको अपने गुर्दे की सफाई क्यों करनी चाहिए?

विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट से छुटकारा पाने से गुर्दे के कार्य और कुछ खाद्य पदार्थों को संसाधित करने, पोषक तत्वों को अवशोषित करने और भोजन को ऊर्जा में बदलने की इसकी क्षमता में सुधार हो सकता है। भले ही गुर्दे अपने आप सफाई या डिटॉक्स करने में सक्षम हों, लेकिन वे इष्टतम रूप से काम नहीं कर रहे हैं। इससे थकान, सूजन और नींद में खलल जैसे लक्षण हो सकते हैं। अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह संभावित संक्रमण और मूत्राशय की समस्याओं के जोखिम को रोकता है।

जीवनशैली में कुछ बदलाव और किडनी के अनुकूल खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों पर आधारित आहार का सेवन प्राकृतिक विषहरण प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है। यह दर्दनाक किडनी स्टोन होने की संभावना को भी कम कर सकता है, हार्मोनल असंतुलन में सुधार कर सकता है और मुँहासे, एक्जिमा और चकत्ते जैसी त्वचा की समस्याओं को दूर रख सकता है।



अपने गुर्दे की देखभाल

आप अपनी किडनी की देखभाल करके और स्वस्थ विकल्प अपनाकर भी उन्हें साफ़ कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • धूम्रपान से बचना;
  • बहुत अधिक शराब और कैफीन से दूर रहना;
  • सामान्य रक्तचाप और शर्करा के स्तर को बनाए रखना;
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखना;
  • पर्याप्त मात्रा में पानी और स्वस्थ पेय पदार्थ पीना;
  • स्वस्थ वजन बनाए रखना;
  • नियमित रूप से व्यायाम करना;
  • अपने तनाव के स्तर को प्रबंधित करना।

अपने गुर्दे की देखभाल और सफाई के साथ-साथ लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेने में मदद मिल सकती है। आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीकर और नमक का सेवन कम करके गुर्दे की पथरी के जोखिम को कम कर सकते हैं। किडनी डिटॉक्स के बारे में अच्छी बात यह है कि यह न केवल आपके गुर्दे को बल्कि शरीर के हर अंग को डिटॉक्स करता है।


मंगलवार, 13 मई 2025

डायलिसिस क्या होता है?

 डायलिसिस एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसका उपयोग किडनी की कार्यक्षमता के नुकसान के कारण शरीर में जमा हुए विषाक्त पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थों को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए आवश्यक होता है जिनकी किडनियाँ ठीक से काम नहीं कर रही होतीं, यानी किडनी फेलियर (Kidney Failure) की स्थिति में।



डायलिसिस के दो मुख्य प्रकार होते हैं:

  1. हेमोडायलिसिस (Hemodialysis):
    इसमें शरीर से रक्त बाहर निकाला जाता है और एक मशीन (डायलाइज़र) के माध्यम से उसे शुद्ध किया जाता है। फिर शुद्ध रक्त को शरीर में वापस डाला जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर अस्पताल या डायलिसिस सेंटर में की जाती है, और यह सप्ताह में तीन बार होती है, प्रत्येक सत्र का समय लगभग 3-4 घंटे होता है।

  2. पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis):
    इसमें शरीर के अंदर एक विशेष तरल पदार्थ (डायलिसेट) डाला जाता है जो पेट की परत (पेरिटोनियम) में अवशोषित करता है। यह प्रक्रिया घर पर भी की जा सकती है और इसमें रक्त को बाहर निकालने की बजाय पेट की परत का उपयोग करके शरीर से अवांछित पदार्थों को बाहर निकाला जाता है।

डायलिसिस के द्वारा किडनी की कार्यक्षमता की कमी को कुछ समय तक नियंत्रित किया जाता है, लेकिन यह किडनी के पूरी तरह से काम करने की प्रक्रिया को नहीं ठीक करता। किडनी ट्रांसप्लांटेशन (Kidney Transplantation) एक और विकल्प हो सकता है, जो स्थायी इलाज प्रदान करता है।

1. डायलिसिस की आवश्यकता क्यों होती है?

डायलिसिस उन लोगों को चाहिए जिनकी किडनियाँ काम करना बंद कर देती हैं, या जिनकी किडनियाँ बहुत ज्यादा खराब हो जाती हैं (क्रोनिक किडनी डिजीज)। किडनियाँ रक्त को फिल्टर करती हैं, विषाक्त पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालती हैं, और शरीर में विभिन्न रासायनिक तत्वों को संतुलित करती हैं। जब किडनियाँ ठीक से काम नहीं करतीं, तो शरीर में विषाक्त पदार्थ और तरल जमा होने लगते हैं, जो जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। डायलिसिस इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है।



2. डायलिसिस के दौरान क्या होता है?

  • हेमोडायलिसिस: इस प्रक्रिया में, एक कैथेटर (सुई) के माध्यम से रक्त शरीर से बाहर निकाला जाता है और फिर डायलाइज़र (जो एक प्रकार का फिल्टर होता है) के माध्यम से शुद्ध किया जाता है। शुद्ध रक्त फिर से शरीर में वापस भेजा जाता है। डायलिसिस के दौरान, शरीर का रक्त एक फिल्टर से गुजरता है, जो उसे साफ करता है।

  • पेरिटोनियल डायलिसिस: इसमें शरीर के अंदर एक विशेष कैथेटर डाला जाता है, और उसमें डायलिसेट नामक एक तरल पदार्थ भर दिया जाता है। यह तरल पेट की आंतरिक परत के माध्यम से रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालने का काम करता है। फिर इसे कुछ घंटों के बाद शरीर से बाहर निकाला जाता है। पेरिटोनियल डायलिसिस को घर पर भी किया जा सकता है और यह लगातार या कुछ समय के लिए किया जा सकता है।

3. डायलिसिस की प्रक्रिया कितनी लंबी होती है?

  • हेमोडायलिसिस में आमतौर पर प्रत्येक सत्र का समय लगभग 3-4 घंटे होता है। यह प्रक्रिया सप्ताह में 3 बार की जाती है।

  • पेरिटोनियल डायलिसिस घर पर किया जाता है और यह प्रक्रिया निरंतर या दिन में कुछ समय के लिए होती है।

4. डायलिसिस के फायदे और नुकसान:

फायदे:

  • यह शरीर में विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

  • यह शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ और सोडियम को नियंत्रित करता है।

  • यह जीवन बचाने के लिए आवश्यक हो सकता है यदि किडनी पूरी तरह से फेल हो जाती है।

नुकसान:

  • डायलिसिस एक स्थायी इलाज नहीं है। यह सिर्फ एक "समय निकालने" वाली प्रक्रिया है, जो किडनी ट्रांसप्लांट तक मरीज को जीवित रखने में मदद करती है।

  • हेमोडायलिसिस से संबंधित जोखिम जैसे कि संक्रमण, रक्तदाब में उतार-चढ़ाव, या कभी-कभी रक्त के थक्के बनने का खतरा हो सकता है।

  • पेरिटोनियल डायलिसिस में भी संक्रमण का खतरा होता है, विशेषकर यदि कैथेटर की देखभाल सही तरीके से न की जाए।


5. किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस

डायलिसिस एक अस्थायी समाधान है, और यदि किडनी की स्थिति बहुत खराब हो जाती है, तो डॉक्टर किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दे सकते हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद, नई किडनी शरीर में काम करना शुरू कर देती है और डायलिसिस की आवश्यकता नहीं रहती।

डायलिसिस का महत्व तब बढ़ जाता है जब किडनी की कार्यक्षमता बहुत कम हो जाती है, और किडनी ट्रांसप्लांट की संभावना नहीं होती। इसके बावजूद, डायलिसिस से जीवनकाल बढ़ सकता है और जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

6. क्या डायलिसिस के दौरान कोई विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है?

  • आहार: डायलिसिस के मरीजों को अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए, खासकर फास्फोरस, पोटेशियम, और सोडियम की मात्रा पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण है।

  • दवाइयाँ: डायलिसिस के दौरान कुछ दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है, जैसे कि रक्तदाब को नियंत्रित करने वाली दवाइयाँ या किडनी के लिए सप्लीमेंट्स।

  • सैनिटेशन: पेरिटोनियल डायलिसिस में संक्रमण का खतरा होता है, इसलिए सही तरीके से हाथ धोना और कैथेटर की देखभाल जरूरी होती है।

डायलिसिस जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह एक स्थायी इलाज नहीं है। किडनी ट्रांसप्लांट को विचार किया जाता है अगर वह संभव हो।

मंगलवार, 15 अप्रैल 2025

किडनी के मरीजों को डायलिसिस की जरूरत कब पड़ती है?

 कई कारणों से लोगों को डायलिसिस की जरूरत हो सकती है, लेकिन रक्त से अपशिष्ट उत्पादों को पर्याप्त रूप से फ़िल्टर करने के लिए किडनी की अक्षमता (किडनी की विफलता) सबसे आम है। किडनी के प्रकार्य में जल्दी से गिरावट आ सकती है (जिसे एक्यूट किडनी इंजरी या एक्‍यूट किडनी फेलियर कहा जाता है), या किडनी धीरे-धीरे अपशिष्ट उत्पादों को फ़िल्टर करने की अपनी क्षमता खो सकती हैं (जिसे क्रोनिक किडनी डिसीज़ या क्रोनिक किडनी फेलियर कहा जाता है)।


किडनी की विफलता से पीड़ित लोगों में, जब रक्त परीक्षण से पता चलता है कि किडनी अब अपशिष्ट उत्पादों को पर्याप्त रूप से फ़िल्टर नहीं कर सकती हैं और संचित अपशिष्ट उत्पाद समस्याएं पैदा करते हैं, तो कई डॉक्टर डायलिसिस की सलाह देते हैं। एक्यूट किडनी इंजरी के लिए, डॉक्टर तब तक डायलिसिस जारी रखते हैं जब तक कि व्यक्ति के रक्त परीक्षण के परिणाम यह संकेत नहीं देते हैं कि किडनी की कार्यक्षमता पर्याप्त रूप से ठीक हो गई है। क्रोनिक किडनी डिसीज़ से पीड़ित लोगों के लिए, डायलिसिस का उपयोग दीर्घकालिक थेरेपी के रूप में या अस्थायी उपाय के रूप में तब तक किया जा सकता है जब तक कि व्यक्ति किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवा लेता है। अल्पकालिक या तत्काल डायलिसिस का उपयोग शरीर से फ़्लूड, कुछ दवाओं या जहर को हटाने के लिए भी किया जा सकता है।

कुछ लोगों को अज्ञात कारणों से किडनी की समस्या हो जाती है। किडनी फेलियर एक दीर्घकालिक स्थिति हो सकती है, या यह किसी गंभीर बीमारी या चोट के बाद अचानक (तीव्र) हो सकती है। तीव्र किडनी फेलियर ठीक हो सकता है।

किडनी रोग के पाँच चरण होते हैं। चरण 5 किडनी रोग में, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आपको किडनी फेलियर में मानते हैं। इस बिंदु पर, आपके गुर्दे अपनी सामान्य दर के केवल 15% से भी कम पर काम करते हैं। जीवित रहने के लिए आपको डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है । कुछ लोग ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा करते समय डायलिसिस करवाते हैं।


क्या डायलिसिस करवाना गंभीर बात है?

हां, डायलिसिस पर जाना गंभीर है। यदि आपको डायलिसिस की आवश्यकता है और आप इसे शुरू नहीं करना चाहते या बंद करने का निर्णय लेते हैं, तो आपके रक्त में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाएंगे ( यूरीमिया )। उपचार के बिना किडनी फेलियर घातक है । यदि आपको किडनी फेलियर है, तो आप डायलिसिस के बिना कुछ दिन या सप्ताह जीवित रह सकते हैं।

डायलिसिस कितना आम है?

डायलिसिस आम बात है। दुनिया भर में 2 मिलियन से ज़्यादा लोग किडनी की बीमारी का इलाज डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट से करवाते हैं।


डायलिसिस कितने समय तक चलता है?

यह डायलिसिस के प्रकार पर निर्भर करता है।

इन-सेंटर हेमोडायलिसिस को पूरा होने में लगभग तीन से चार घंटे लगते हैं, और आपको प्रति सप्ताह कम से कम तीन बार इसकी आवश्यकता होगी। घर पर हेमोडायलिसिस के प्रकार के आधार पर, आपको प्रति सप्ताह तीन से सात दिन इसकी आवश्यकता हो सकती है, और सत्र तीन से आठ घंटे तक चल सकते हैं।

निरंतर एम्बुलेटरी पेरीटोनियल डायलिसिस में आमतौर पर लगभग 40 मिनट लगते हैं, और आपको हर दिन तीन से पांच सत्रों की आवश्यकता होगी। स्वचालित पेरीटोनियल डायलिसिस में आठ से 12 घंटे लग सकते हैं, और आपको इसे हर दिन करने की आवश्यकता हो सकती है।

डायलिसिस के क्या लाभ हैं?

डायलिसिस का प्राथमिक लाभ यह है कि यह आपके रक्त से अपशिष्ट उत्पादों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानकर किडनी की विफलता का इलाज करता है। डायलिसिस के बिना - या किडनी प्रत्यारोपण के बिना - किडनी की विफलता घातक है।

दोनों प्रकार के डायलिसिस के अलग-अलग लाभ हैं। किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें - वे आपके साथ दोनों प्रकार के डायलिसिस की समीक्षा कर सकते हैं और आपके और आपकी जीवनशैली के लिए सबसे अच्छा डायलिसिस सुझा सकते हैं।

क्या डायलिसिस के बाद गुर्दे फिर से काम करना शुरू कर सकते हैं?

डायलिसिस से अंतिम चरण की किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर का इलाज नहीं हो सकता। जब तक आप किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवा लेते, आपको जीवन भर डायलिसिस की जरूरत पड़ेगी।


क्या डायलिसिस दर्दनाक है?

हेमोडायलिसिस के दौरान जब स्वास्थ्य सेवा प्रदाता सुई डालता है तो आपको हल्की चुभन महसूस हो सकती है। लेकिन यह प्रक्रिया दर्दनाक नहीं होती।

पेरिटोनियल डायलिसिस दर्दनाक नहीं है। लेकिन आपके पेट में डायलिसिस के कारण आपको पेट फूला हुआ, ठंडा और असहज महसूस हो सकता है।

क्या डायलिसिस के दौरान मेरी गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा?

डायलिसिस पर कई लोग सक्रिय जीवन जीते हैं, जिसमें काम करना, परिवार का पालन-पोषण करना और यात्रा करना शामिल है। जब आप यात्रा करते हैं, तो एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आपके यात्रा गंतव्य पर एक केंद्र में डायलिसिस कराने की व्यवस्था करने में आपकी मदद कर सकता है। यदि आप पेरिटोनियल डायलिसिस कर रहे हैं, तो आप अपने साथ डायलिसिस समाधान बैग और एक पोर्टेबल होम डायलिसिस मशीन (यदि आवश्यक हो) ले जा सकते हैं।

यदि आप पेरिटोनियल डायलिसिस का उपयोग करते हैं, तो आपको अपने पेट में डायलिसिस के भर जाने पर अपने व्यायाम या कुछ शारीरिक गतिविधियों को सीमित करने की आवश्यकता हो सकती है। अन्यथा, डायलिसिस पर लोगों के लिए व्यायाम ठीक है। अपने प्रदाता से विशिष्ट गतिविधियों और खेलों के बारे में बात करें।


शुक्रवार, 21 मार्च 2025

घर पर किडनी की सेहत कैसे चेक करें?

 घर पर किडनी की सेहत जांचने के लिए, आप मूत्र परीक्षण कर सकते हैं, जो प्रोटीन, रक्त या ग्लूकोज की उपस्थिति का पता लगा सकता है, जो किडनी की समस्याओं के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा, आप एल्बुमिन होम टेस्ट किट या स्मार्टफोन-सक्षम होम यूरिनलिसिस डिवाइस का उपयोग कर सकते हैं।

  • सरल मूत्र परीक्षण: आमतौर पर मूत्र में एल्ब्यूमिन मौजूद नहीं होता है। यह परीक्षण किट सुविधाजनक है और एल्ब्यूमिन्यूरिया का सटीक निदान कर सकता है
    (मूत्र में एल्ब्यूमिन की उपस्थिति), जो किडनी की क्षति का संकेत है। एक व्यक्ति एल्ब्यूमिन्यूरिया की सीमा का रिकॉर्ड रख सकता है और उसके अनुसार डॉक्टर से मिलने की योजना बना सकता है।

    गुर्दे के 8 प्रमुख कार्य 

  • इलेक्ट्रोलाइट्स
  • अपशिष्ट उत्पादों का उत्सर्जन
  • बनाए रखने के लिए अतिरिक्त द्रव को निकालनाइलेक्ट्रोलाइट
  • का निष्कासनड्रग्स
  • रसायनों का संतुलन बनाए रखें
  • रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए हार्मोन जारी करें
  • के सक्रिय रूप का उत्पादनविटामिन डी
  • लाल रक्त कोशिका उत्पादन को नियंत्रित करता है

    गुर्दे के प्राथमिक कार्यों में शामिल हैं:

    अपशिष्ट और विष को हटाना: गुर्दे रक्त को छानते हैं, चयापचय से उत्पन्न अपशिष्ट उत्पादों, जैसे यूरिया और क्रिएटिनिन को हटाते हैं, और उन्हें मूत्र में उत्सर्जित करते हैं। वे अतिरिक्त दवाओं और विषाक्त पदार्थों को भी हटाते हैं जो शायद अंतर्ग्रहण या अवशोषित हो गए हों।

    किडनी की कार्यप्रणाली की जांच करना क्यों महत्वपूर्ण है?

    किडनी की बीमारियों से कई तरह की जटिलताएँ हो सकती हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप, एनीमिया, कमज़ोर हड्डियाँ और तंत्रिका क्षति शामिल हैं। अगर इलाज न कराया जाए, तो किडनी की बीमारियाँ किडनी फेलियर का कारण बन सकती हैं, जिसके लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत होती है। समय रहते पता लगाने और उचित प्रबंधन से किडनी की बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसलिए, नियमित रूप से अपने किडनी फंक्शन की जाँच करना ज़रूरी है, खासकर अगर आपके परिवार में किडनी की समस्याओं का इतिहास रहा हो या आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित हों।


    घर पर किडनी की कार्यप्रणाली की जांच कैसे करें?

    घर पर किडनी की कार्यप्रणाली की जांच करने के कई तरीके हैं। ये तरीके आपकी किडनी के स्वास्थ्य की निगरानी करने और किसी भी असामान्यता का जल्द पता लगाने में आपकी मदद कर सकते हैं। हालाँकि, व्यापक मूल्यांकन और उचित निदान के लिए किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से परामर्श करना आवश्यक है।

  • मूत्र परीक्षण
  • घर पर किडनी के स्वास्थ्य की जांच करने का एक सरल तरीका मूत्र परीक्षण करना है। ये परीक्षण मूत्र में प्रोटीन, रक्त या ग्लूकोज की उपस्थिति का पता लगा सकते हैं - ये सभी गुर्दे की समस्याओं के संकेतक हो सकते हैं। आप अपने स्थानीय फार्मेसी या ऑनलाइन से मूत्र परीक्षण स्ट्रिप्स खरीद सकते हैं। परीक्षण करने के लिए, परीक्षण स्ट्रिप्स के साथ दिए गए निर्देशों का पालन करें। स्ट्रिप पर रंग परिवर्तन यह संकेत देगा कि आपके मूत्र में कोई असामान्यता है या नहीं। यदि आपको कोई असामान्य परिणाम दिखाई देता है, तो आगे के मूल्यांकन के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

    • रक्तचाप की निगरानी

    उच्च रक्तचाप गुर्दे की बीमारी का एक कारण और लक्षण दोनों है। नियमित रूप से अपने रक्तचाप की निगरानी करने से आपको अपने गुर्दे के स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी समस्या की पहचान करने में मदद मिल सकती है। आप किसी फार्मेसी या ऑनलाइन से ब्लड प्रेशर मॉनिटर खरीद सकते हैं और घर पर अपना रक्तचाप जांच सकते हैं। सटीक रीडिंग के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित करें, जैसे कि आराम की स्थिति में बैठना और अपने हाथ को हृदय के स्तर पर रखना। यदि आपको लगातार उच्च रक्तचाप की रीडिंग मिलती है, तो आगे के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।


    • लक्षणों पर नज़र रखें

    किडनी रोग के सामान्य लक्षणों के बारे में जानकारी होने से आपको किसी भी समस्या का पहले ही पता लगाने में मदद मिल सकती है। कुछ संकेत और लक्षण इस प्रकार हैं:

    • टखनों, पैरों या हाथों में सूजन
    • थकान और कमजोरी
    • पेशाब की आवृत्ति और मात्रा में परिवर्तन
    • झागदार या खून वाला मूत्र
    • समुद्री बीमारी और उल्टी
    • लगातार खुजली
    • सांस लेने में कठिनाई
    • भूख में कमी
    • नींद न आना

    यदि आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो आगे के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श लें।

    मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

    कैसे पता चलेगा कि किडनी खराब है?

     किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाता है। किडनी का मुख्य कार्य रक्त को फिल्टर करना है और अपशिष्ट उत्पादों को रक्त से हटाकर इलेक्ट्रोलाइट्स और ब्लड प्रेशर जैसे आवश्यक कारकों को नियंत्रित करना है। किडनी खराब होने की समस्या समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। यही कारण है कि अक्सर शुरुआती चरणों में किडनी खराब होने के लक्षण उत्पन्न ही नहीं होते हैं। 

    जैसे-जैसे किडनी की कार्य करने की क्षमता कम होती है, लक्षण अधिक स्पष्ट होने लगते हैं। जब तक लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक किडनी को अपरिवर्तनीय नुकसान हो जाता है। इसलिए समय पर निदान और प्रभावी उपचार के लिए किडनी की विफलता के शुरुआती लक्षणों को पहचानना आवश्यक होता है और सही समय पर एक श्रेष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologists) से भी मिलने का सुझाव दिया जाता है।

    किडनी की बीमारी का पता लगाने वाला एक सरल रक्त परीक्षण क्रिएटिनिन परीक्षण है। मांसपेशियों की कोशिकाओं के सामान्य टूटने से उत्पन्न अपशिष्ट उत्पाद है। स्वस्थ गुर्दे रक्त से क्रिएटिनिन को छानकर मूत्र में डाल देते हैं। यदि गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो क्रिएटिनिन रक्त में जमा हो जाता है।



    किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण


    किडनी खराब होने पर पेशेंट को निम्न लक्षणों का अनुभव हो सकता है - 

    • बार-बार पेशाब आना: किडनी की समस्याओं के शुरुआती लक्षणों में बार-बार पेशाब आना एक मुख्य लक्षण है। पेशेंट इस समस्या का सामना सबसे ज्यादा रात में ही करते हैं। 
    • कम पेशाब आना: दूसरी ओर कुछ लोगों को कम पेशाब आता है, जिसका सीधा संबंध किडनी की समस्या से होता है।
    • मूत्र में रक्त (हेमाट्यूरिया): मूत्र में रक्त का मिलना विभिन्न किडनी रोग का संकेत देता है। इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में हेमाट्यूरिया (Hematuria) भी कहा जाता है।
    • प्रोटीनुरिया (Proteinuria): स्वस्थ किडनी का कार्य अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को फिल्टर करना है। इसके साथ-साथ किडनी शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन को शरीर में ही रहने देते हैं। हालांकि, किडनी की बीमारी के शुरुआती चरणों में मूत्र में प्रोटीन का रिसाव हो सकता है, जिसे प्रोटीनूरिया कहा जाता है। 
    • सूजन: किडनी खराब होने से शरीर में नमक और पानी जमा होने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में सूजन होने लगती है। विशेष रूप से खराब किडनी की स्थिति में टखनों, पैरों और चेहरे पर सूजन दिखने लग जाती है। यह सूजन सुबह के समय अधिक देखने को मिलती है।
    • थकान और कमजोरी: जब किडनी सही से काम नहीं कर पाती है, तो इसके कारण शरीर में हानिकारक पदार्थ जमा होने लग जाते हैं। इसके कारण थकान, कमजोरी और ऊर्जा में कमी देखने को मिलती है।
    • हाई ब्लड प्रेशर: किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान हो जाता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और किडनी डैमेज होने की शुरुआत हो जाती है। 
    • पीठ दर्द: किडनी की समस्या में पीठ दर्द तो होता ही है, लेकिन इसकी तीव्रता और स्थान अलग-अलग होते हैं। 
    • भूख और स्वाद में बदलाव: किडनी रोग के प्रारंभिक चरण में रोगी को मुंह में धातु जैसा स्वाद या भूख की कमी का अनुभव होता है।
    • रूखी और खुजलीदार त्वचा: जब किडनी रक्त से हानिकारक पदार्थों को हटाने में सक्षम नहीं हो पाते हैं, तो इसके कारण वह पदार्थ शरीर में जमा होने लगते हैं, जिसके कारण सूखापन और खुजली सहित त्वचा की अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। 
    • मतली और उल्टी: जैसे ही हानिकारक पदार्थ रक्त में जमा होने लगते हैं, इसके कारण रोगी को मतली और उल्टी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या अक्सर सुबह देखने को मिलती है।
    • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: किडनी जब अपना सामान्य काम नहीं कर पाती है, तो इसके कारण दिमाग को भी अपना सामान्य काम करने में समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके कारण ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत तो होती ही है, इसके साथ-साथ व्यक्ति को चीजों को याद रखने में भी समस्या आती है। 

    किडनी खराब होने के लक्षण और उपाय किसी को भी समय रहते उचित इलाज प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए लक्षण दिखने पर तुरंत एक अनुभवी और श्रेष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर (किडनी के डॉक्टर) से मिलें।



    निष्कर्ष

    किडनी डैमेज होना एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो धीरे-धीरे विकसित होती है, और अक्सर शुरुआती चरणों में ध्यान देने योग्य लक्षण नहीं होते हैं। समय पर निदान और प्रभावी उपचार के लिए किडनी की विफलता के शुरुआती लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है। शुरुआती सामान्य लक्षणों में पेशाब में बदलाव, पेशाब में खून, पेशाब में प्रोटीन, सूजन, थकान, हाई ब्लड प्रेशर, पीठ दर्द, भूख और स्वाद में बदलाव, शुष्क त्वचा और खुजली वाली त्वचा, मतली, उल्टी, अस्पष्टीकृत वजन कम होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई शामिल है। 

    अगर आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं या उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में आते हैं, तो तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श से मिलें । शीघ्र हस्तक्षेप से किडनी की बीमारी का प्रबंधन आसान हो जाता है। याद रखें कि नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली किडनी की समस्याओं को रोकने और आपके किडनी को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।