सोमवार, 30 मार्च 2026

किडनी की देखभाल कैसे करे

 किडनी हमारे शरीर का वह फिल्टर है जो खून से गंदगी साफ करने और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किडनी का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।



किडनी को स्वस्थ रखने के कुछ मुख्य तरीके यहाँ दिए गए हैं:

1. हाइड्रेटेड रहें (पानी का सही सेवन)

दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना किडनी के लिए सबसे जरूरी है। यह शरीर से सोडियम और टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने में मदद करता है। हालांकि, बहुत अधिक पानी भी न पिएं; शरीर की जरूरत के हिसाब से 2 से 3 लीटर पानी पर्याप्त है।

2. आहार में बदलाव

  • नमक कम करें: ज्यादा नमक (सोडियम) ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जो किडनी पर दबाव डालता है।

  • प्रोसेस्ड फूड से बचें: पैकेट बंद खाना और जंक फूड में फास्फोरस और सोडियम अधिक होता है, जो किडनी के लिए हानिकारक है।

  • ताजे फल और सब्जियां: सेब, ब्लूबेरी, मछली और फूलगोभी जैसी चीजें किडनी के लिए अच्छी मानी जाती हैं।

3. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

  • शुगर (Diabetes): अगर आपको मधुमेह है, तो उसे नियंत्रित रखें। किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण हाई शुगर ही है।

  • ब्लड प्रेशर: हाई बीपी किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है। इसे 120/80 के करीब रखने की कोशिश करें।

4. दवाओं का सावधानी से उपयोग

बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स (Painkillers) जैसे कि इबुप्रोफेन या डिक्लोफेनाक का बार-बार सेवन न करें। ये दवाएं किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती हैं।



5. सक्रिय जीवनशैली

  • व्यायाम: नियमित वॉक, योग या एक्सरसाइज करने से वजन कंट्रोल में रहता है और रक्तचाप सामान्य रहता है।

  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान से किडनी में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे उनके ठीक से काम करने की क्षमता कम हो जाती है।

6. नियमित जांच (Check-up)

अगर आपको हाई बीपी, डायबिटीज या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है, तो साल में कम से कम एक बार KFT (Kidney Function Test) जरूर करवाएं।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

डायलिसिस से होने वाले नुकसान

 डायलिसिस एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, लेकिन चूंकि यह शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग (किडनी) का काम कृत्रिम रूप से करती है, इसलिए इसके कुछ शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभाव (Side effects) हो सकते हैं।

यहाँ डायलिसिस से होने वाले मुख्य नुकसान और समस्याओं की जानकारी दी गई है:



1. शारीरिक दुष्प्रभाव (Physical Side Effects)

डायलिसिस के दौरान शरीर में तरल पदार्थ और खनिजों का स्तर तेजी से बदलता है, जिससे ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • लो ब्लड प्रेशर (Hypotension): यह सबसे आम समस्या है। जब शरीर से अतिरिक्त तरल निकाला जाता है, तो रक्तचाप अचानक गिर सकता है, जिससे चक्कर आना या जी मिचलाना महसूस होता है।

  • मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle Cramps): पैरों या हाथों में तेज दर्द और ऐंठन हो सकती है, जो अक्सर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन के कारण होती है।

  • थकान और कमजोरी: डायलिसिस की प्रक्रिया शरीर को काफी थका देती है। कई मरीज उपचार के बाद "वॉश आउट" (एकदम ऊर्जा खत्म होना) महसूस करते हैं।

  • त्वचा में खुजली: शरीर में फास्फोरस का स्तर बढ़ने या त्वचा के सूखने के कारण तेज खुजली हो सकती है।

  • एनीमिया (खून की कमी): किडनी 'एरिथ्रोपोइटिन' हार्मोन बनाना बंद कर देती है, जिससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है।

2. संक्रमण का खतरा (Risk of Infection)

जहाँ से खून निकाला और वापस डाला जाता है (जैसे कैथेटर या फिस्टुला), वहां संक्रमण होने का काफी जोखिम रहता है। यदि सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो यह संक्रमण रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल सकता है (Sepsis)।

3. हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं

लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने से हृदय पर दबाव बढ़ता है। इससे हृदय गति का बढ़ना या हृदय की मांसपेशियों का सख्त होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

4. जीवनशैली और मानसिक प्रभाव

  • समय की पाबंदी: हीमोडायलिसिस के लिए हफ्ते में 3 बार, करीब 4-4 घंटे अस्पताल में बिताने पड़ते हैं, जिससे सामान्य दिनचर्या प्रभावित होती है।

  • डिप्रेशन और तनाव: पुरानी बीमारी और बार-बार अस्पताल जाने के कारण कई मरीज मानसिक रूप से परेशान या उदास महसूस करने लगते हैं।

  • खान-पान पर सख्त पाबंदी: पानी की मात्रा, नमक, पोटेशियम और फास्फोरस के सेवन पर कड़ा नियंत्रण रखना पड़ता है।



महत्वपूर्ण बात

हालांकि ये नुकसान डरावने लग सकते हैं, लेकिन किडनी फेलियर की स्थिति में डायलिसिस न करवाना जानलेवा हो सकता है। इनमें से अधिकांश दुष्प्रभावों को सही डाइट, दवाइयों और डॉक्टर की सलाह मानकर नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यदि आपको डायलिसिस के दौरान या बाद में तेज बुखार, कंपकंपी या फिस्टुला वाली जगह पर सूजन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बुधवार, 28 जनवरी 2026

क्या डायलिसिस बंद हो सकता है?

 हाँ, डायलिसिस बंद हो सकता है, लेकिन यह एक गंभीर निर्णय है जो केवल डॉक्टर और मरीज की आपसी सहमति से, पूरी समझ के साथ लिया जाता है, क्योंकि यह जीवन-रक्षक उपचार है; मरीज किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के बाद डायलिसिस बंद कर सकता है, या जीवन की गुणवत्ता और आराम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अंतिम चरण की देखभाल (पैलिएटिव केयर) के हिस्से के रूप में इसे बंद कर सकता है, जिसके बाद मरीज के पास कुछ दिन या सप्ताह ही बच सकते हैं।


डायलिसिस बंद करने के कारण और स्थितियाँ:

  1. किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट): यह डायलिसिस से पूरी तरह छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है, जिसके बाद व्यक्ति लगभग सामान्य जीवन जी सकता है (दवाओं के साथ)।

  2. जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना: जब डायलिसिस की शारीरिक और मानसिक मांगें भारी हो जाती हैं और मरीज अपने बचे हुए समय को परिवार के साथ बिताना चाहता है, तो आराम पर केंद्रित देखभाल (पैलिएटिव केयर) के लिए डायलिसिस बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।

  3. तीव्र गुर्दा चोट (Acute Kidney Injury): कुछ मामलों में, किडनी की चोट ठीक हो जाती है और मरीज समय पर डायलिसिस बंद कर सकता है।

  4. अन्य गंभीर बीमारियाँ: यदि मरीज को अन्य गंभीर बीमारियाँ हैं और डायलिसिस जीवन बचाने के बजाय केवल मृत्यु को लंबा कर रहा है, तो इसे बंद किया जा सकता है।

क्या होता है जब डायलिसिस बंद हो जाता है (अंतिम चरण की देखभाल):

  • लक्षणों का प्रबंधन: शरीर में तरल पदार्थ जमा होने और विषाक्त पदार्थों के कारण थकान, सांस लेने में तकलीफ और अन्य लक्षण हो सकते हैं, जिनका प्रबंधन दवाओं (जैसे मूत्रवर्धक) से किया जाता है।

  • आराम और देखभाल: इस दौरान पैलिएटिव (प्रशामक) या धर्मशाला (हॉस्पिस) देखभाल प्रदान की जाती है ताकि मरीज आरामदायक और शांत महसूस करे।

  • सीमित समय: डायलिसिस बंद करने के बाद मरीज के पास आमतौर पर कुछ दिन या सप्ताह ही बचते हैं, और यह एक व्यक्तिगत निर्णय होता है।


निष्कर्ष:

डायलिसिस बंद करने का निर्णय एक बहुत ही व्यक्तिगत और कठिन होता है, जिसे डॉक्टर, परिवार और मरीज की सहमति से लिया जाता है, खासकर जब यह जीवन के अंतिम चरण में होता है या प्रत्यारोपण संभव हो।


मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

घर पर किडनी की सेहत कैसे चेक करें?

 किडनी की सेहत की जांच घर पर पूरी तरह से लैब टेस्ट की तरह तो नहीं की जा सकती, लेकिन कुछ शारीरिक लक्षणों और होम टेस्टिंग किट्स की मदद से आप इसकी स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

यहाँ कुछ आसान तरीके दिए गए हैं जिनसे आप घर पर अपनी किडनी की सेहत पर नज़र रख सकते हैं:


1. पेशाब में बदलाव (Urine Observation)

किडनी की खराबी का सबसे पहला संकेत पेशाब में दिखता है:

  • झाग आना: अगर पेशाब में साबुन के झाग जैसा बहुत ज्यादा झाग बन रहा है, तो यह पेशाब में प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) लीक होने का संकेत हो सकता है।

  • रंग में बदलाव: गहरा पीला, लाल या कोला (भूरा) जैसा रंग खून या इन्फेक्शन की ओर इशारा करता है।

  • बार-बार जाना: खास तौर पर रात के समय बार-बार पेशाब आने की ज़रूरत महसूस होना।

2. शारीरिक संकेतों को पहचानें

  • सूजन (Edema): अगर आपके पैरों, टखनों (ankles) या आंखों के नीचे सुबह के वक्त सूजन दिखाई देती है, तो इसका मतलब है कि किडनी शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी बाहर नहीं निकाल पा रही है।

  • त्वचा में खुजली और सूखापन: खून में टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) जमा होने पर त्वचा में बेवजह खुजली और सूखापन हो सकता है।

  • जल्दी थकान होना: किडनी 'एरिथ्रोपोएटिन' हार्मोन बनाती है जो खून बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से थकान और कमजोरी महसूस होती है।


3. होम टेस्टिंग किट्स (Home Test Kits)

अब बाजार में ऐसी 'यूरिन टेस्ट किट्स' (जैसे Neodocs या GetTested) उपलब्ध हैं जिनसे आप घर बैठे जांच कर सकते हैं।

  • इनमें एक स्ट्रिप (Strip) होती है जिसे पेशाब के सैंपल में डुबाना होता है।

  • यह स्ट्रिप प्रोटीन, क्रिएटिनिन और ग्लूकोज जैसे लेवल चेक करती है।

  • स्मार्टफोन ऐप के जरिए आप तुरंत रिजल्ट देख सकते हैं।

4. बीपी और शुगर की जांच

अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, तो आप रिस्क जोन में हैं। घर पर नियमित रूप से इनका लेवल चेक करें, क्योंकि ये दोनों बीमारियां किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण हैं।


जरूरी सूचना: ये घर पर किए जाने वाले टेस्ट केवल शुरुआती संकेत दे सकते हैं। यदि आपको कोई गंभीर लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से मिलकर KFT (Kidney Function Test) जरूर करवाएं, जिसमें सीरम क्रिएटिनिन और GFR की सटीक जांच होती है।




जीवनशैली और खानपान
  1. हाइड्रेटेड रहें
    दिन भर में 8-10 गिलास पानी पिएं (पेशाब का रंग हल्का पीला होना चाहिए), यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, पर ज्यादा पानी की जरूरत व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करती है. 
  2. नमक कम करें
    प्रोसेस्ड और पैकेट वाले खाने से बचें, क्योंकि इनमें सोडियम (नमक) ज्यादा होता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी को नुकसान पहुंचाता है.
  3. स्वस्थ आहार
    ताजे फल, सब्जियां खाएं और कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन का संतुलन बनाए रखें; फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स से बचें. 
  4. वजन कंट्रोल करें
    सामान्य वजन बनाए रखें, क्योंकि मोटापा किडनी पर दबाव डालता है. 
  5. धूम्रपान और शराब छोड़ें
    ये दोनों किडनी के लिए बहुत हानिकारक हैं, इनसे पूरी तरह बचें. 
  6. पेनकिलर से बचें
    बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा (पेनकिलर) न लें, ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. 

रविवार, 23 नवंबर 2025

किडनी खराब होने पर कहाँ दर्द होता है?

 गुर्दे (Kidney) खराब होने पर दर्द आमतौर पर इन जगहों पर महसूस हो सकता है, हालांकि यह दर्द का एक लक्षण मात्र है, किडनी खराब होने के और भी कई लक्षण होते हैं:

  • पीठ का निचला हिस्सा (Lower Back): किडनी रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों के नीचे स्थित होती हैं। इसलिए दर्द अक्सर पीठ के निचले हिस्से या बगल (Flank) में महसूस होता है।

  • पसलियों के नीचे: दर्द रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों के ठीक नीचे महसूस हो सकता है। यह दर्द सामान्य पीठ दर्द से गहरा और ऊपर की तरफ हो सकता है।

  • पेट: कभी-कभी यह दर्द पेट के मध्य या ऊपरी हिस्से में भी फैल सकता है।

  • कमर या जांघ: किडनी की पथरी या संक्रमण जैसी समस्याओं में दर्द कमर या जांघों के भीतरी हिस्से तक भी फैल सकता है।



⚠️ महत्वपूर्ण सूचना:

किडनी की समस्या का दर्द आमतौर पर एक तरफ (दाएं या बाएं) होता है, लेकिन कभी-कभी दोनों तरफ भी हो सकता है। यह दर्द हल्का, तेज, या ऐंठन जैसा हो सकता है और धीरे-धीरे बढ़ सकता है।


किडनी खराब होने के अन्य सामान्य लक्षण:

दर्द के अलावा, किडनी खराब होने पर ये अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

  • पेशाब में बदलाव:

    • पेशाब की मात्रा कम होना या बहुत ज़्यादा होना।

    • पेशाब में खून आना, झाग आना, या रंग बदल जाना।

    • पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होना।

  • सूजन (Edema): पैरों, टखनों, पंजों और चेहरे पर सूजन आना, क्योंकि शरीर से अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट बाहर नहीं निकल पाते।

  • थकान और कमजोरी: हर समय थकावट महसूस होना।

  • मतली और उल्टी: जी मिचलाना और उल्टी होना।

  • खुजली: त्वचा पर खुजली या चकत्ते।

  • भूख कम लगना और मुँह का स्वाद खराब होना।

  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को नियंत्रित करना मुश्किल होना।

अगर आपको या आपके किसी परिचित को इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है। सही निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।


कैसे पता करें कि आपको गुर्दे में दर्द है?

आमतौर पर, किडनी दर्द एक या दोनों गुर्दों में होने वाला लगातार होने वाला हल्का दर्द होता है। 

आम तौर पर, दर्द एक किडनी में होता है। अगर यह स्थिति दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करती है, तो आपको दोनों तरफ दर्द महसूस होता है। 

गुर्दे में दर्द के साथ निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:

  • उस क्षेत्र में लगातार और धीमा दर्द 
  • आपके मूत्र में रक्त 
  • धुंधला पेशाब 
  • बुखार और ठंड लगना
  • लगातार पेशाब आना
  • मतली 
  • उल्टी
  • लहरों के रूप में होने वाला तीव्र दर्द
  • दर्द जो कमर तक फैल जाता है 
  • पसलियों के नीचे दर्द 
  • पेशाब के दौरान दर्द या जलन

गुर्दे में दर्द का क्या कारण है?

किडनी में दर्द के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। वे मूत्र प्रणाली से जुड़े भागों जैसे मूत्रवाहिनी और मूत्राशय से जुड़े हो सकते हैं। हालाँकि, पथरीकिडनी में संक्रमण और किडनी कैंसर किडनी में दर्द के कुछ प्रमुख कारण हैं। किडनी में दर्द के संभावित कारण इस प्रकार हैं: 

  • गुर्दे से रक्तस्राव या रक्तस्राव  
  • गुर्दे की नसों या वृक्क शिरा में रक्त के थक्के घनास्त्रता 
  • गुर्दे का ट्यूमर या कैंसर 
  • पत्थर 
  • अल्सर 
  • गुर्दे के संक्रमण जैसे कि पायलोनेफ्राइटिस 
  • hydronephrosis या गुर्दे में सूजन 
  • पॉलीसिस्टिक किडनी रोग  
  • गुर्दे में द्रव्यमान 
  • गुर्दे की चोट  

किसी भी उपचार विकल्प को चुनने से पहले, इसका कारण जानना महत्वपूर्ण है। 

डॉक्टर को कब देखना है?

किडनी में दर्द एक गंभीर स्वास्थ्य जटिलता का संकेत हो सकता है। अगर आपको एक या दोनों किडनी में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो तो उसी दिन अपॉइंटमेंट बुक करें: 

  • लगातार और सुस्त दर्द
  • एक या दोनों तरफ दर्द 
  • बुखार 
  • शरीर में दर्द और थकान  
  • हाल ही में मूत्र मार्ग में संक्रमण 
  • अचानक गुर्दे में दर्द 
  • मूत्र में रक्त 

जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से परामर्श करें ताकि आगे की जटिलताओं से पहले आपकी उपचार योजना शुरू की जा सके।


शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

मैं कैसे चेक करूं कि मेरी किडनी ठीक है या नहीं?

यह जांचने के लिए कि आपकी किडनी ठीक है या नहीं, आप अपने डॉक्टर से रक्त और मूत्र परीक्षण करवा सकते हैं, जैसे कि सीरम क्रिएटिनिन और यूरिन रूटीन टेस्ट। यदि आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, या किडनी की समस्याओं का पारिवारिक इतिहास है, तो नियमित रूप से इन परीक्षणों को करवाना महत्वपूर्ण है। अल्ट्रासाउंड से किडनी के आकार और संरचना का भी पता लगाया जा सकता है। 


जांच के तरीके
  • रक्त परीक्षण:
    • सीरम क्रिएटिनिन: यह आपके रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर को मापता है, जो किडनी की कार्यक्षमता का एक मुख्य संकेतक है।
    • ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN): यह परीक्षण रक्त में यूरिया नाइट्रोजन की मात्रा को मापता है, जो किडनी के ठीक से काम न करने पर बढ़ जाती है।
    • ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर (eGFR): यह एक अनुमानित परीक्षण है जो रक्त परीक्षण के परिणामों के आधार पर आपकी किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करता है।
  • मूत्र परीक्षण:
    • यूरिन रूटीन और माइक्रोस्कोपी: यह पेशाब में प्रोटीन, रक्त और संक्रमण जैसे असामान्यताओं की जांच करता है, जो किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।
    • मूत्र एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात (UACR): यह मूत्र में एल्ब्यूमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) और क्रिएटिनिन के अनुपात को मापता है, जो किडनी की क्षति का शुरुआती संकेत दे सकता है।
  • अन्य परीक्षण:
    • अल्ट्रासाउंड: यह किडनी के आकार, संरचना और किसी भी रुकावट, जैसे पथरी, की पहचान करने में मदद करता है। 
डॉक्टर से कब संपर्क करें
  • यदि आपको लगातार निम्नलिखित में से कोई लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से मिलें:
    • आंखों के नीचे सूजन
    • त्वचा पर खुजली
    • पेशाब की आवृत्ति या रंग में बदलाव (जैसे कि रात में पेशाब करने के लिए उठना, या मूत्र में झाग या रक्त आना)
    • पेशाब में खून आना या रंग का गहरा होना 

मंगलवार, 30 सितंबर 2025

किडनी की समस्या का पहला संकेत क्या है?

 जब बैक्टीरिया या वायरस किडनी में प्रवेश कर जाते हैं, तो इस कारण से किडनी में संक्रमण हो जाता है। किडनी का संक्रमण, एक या दोनों किडनी को प्रभावित कर सकता है। किडनी का संक्रमण, मूत्र पथ संक्रमण  का एक प्रकार है। मेडिकल भाषा में इसे पायलोनेफ्राइटिस कहा जाता है।

किडनी का काम रक्त को शुद्ध करना, अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालना और यूरीन बनाना है। वे आपकी रीढ़ के दोनों ओर स्थित होती हैं, और आंशिक रूप से पसलियों के निचले हिस्से द्वारा संरक्षित होती हैं। किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट का हिस्सा होती हैं और इसमें यूरेटर (मूत्रवाहिनी), ब्लैडर(मूत्राशय) और यूरेथ्रा(मूत्रमार्ग) भी शामिल हैं।




किडनी इन्फेक्शन होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

किडनी खराब होने के लक्षण आमतौर पर कुछ घंटों या दिनों में बहुत तेजी से विकसित होते हैं। किडनी में संक्रमण होने के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • मतली या उल्टी
  • बार-बार यूरीन पास करने की ज़रूरत महसूस होना
  • यूरीन में रक्त या मवाद आना
  • सेप्सिस (यदि इन्फेक्शन को अनुपचारित छोड़ दिया जाए)
  • बुखार
  • पीठ, बाजू या कमर में दर्द
  • कंपकंपी या ठंड लगना
  • दर्द, जलन, और/या बार-बार पेशाब आना
  • दुर्गंधयुक्त मूत्र
  • बहुत कमज़ोरी या थकान महसूस होना
  • भूख में कमी
  • बीमार महसूस करना या बीमार होना
  • दस्त

किडनी इन्फेक्शन होने के कारण क्या हैं?

किडनी में संक्रमण किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन ये महिलाओं में अधिक होता है। इसका कारण यह है कि महिला का मूत्रमार्ग छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया का किडनी तक पहुंचना आसान हो जाता है। साथ ही वे यौन रूप से अधिक सक्रिय होती हैं इसीलिए कम उम्र की महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित होती हैं।

जब किडनी में संक्रमण होता है, तो पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान लक्षणों का अनुभव होगा। 65 वर्ष से कम उम्र के जिस पुरुष को यूटीआई है, उसमें अन्य स्थितियों का निदान होने की संभावना सबसे अधिक है। डॉक्टर अन्य प्रकार के संक्रमणों के लिए भी जांच कर सकते हैं और यूटीआई के लक्षण का पता लगा सकते हैं।

किडनी संक्रमण के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं है:

  • यूटीआई होना
  • किडनी स्टोन
  • गर्भावस्था
  • मधुमेह
  • मूत्र कैथेटर लगा होना
  • पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट
  • संभोग के दौरान बैक्टीरिया का आंत से जननांगों में स्थानांतरण
  • दवा या चिकित्सीय स्थिति के कारण इम्मयूनिटी का कमजोर होना 
  • रीढ़ की हड्डी की चोट या नर्व डैमेज जो ब्लैडर इन्फेक्शन के लक्षणों को रोक सकती है
  • मूत्र पथ का आकार इस प्रकार होना कि मूत्र आसानी से न निकल सके
  • वेसिकोयूरेटरल रिफ्लक्स होना, जहां यूरिनरी ट्रैक्ट यूरिन को वापस यूरेटर में प्रवाहित करने की अनुमति देता है

किडनी इन्फेक्शन को होने से कैसे रोक सकते हैं?

सबसे पहले यूटीआई को रोकने से किडनी संक्रमण की रोकथाम में मदद मिल सकती है, क्योंकि अधिकांश किडनी संक्रमण मूत्राशय और मूत्रमार्ग संक्रमण के रूप में शुरू होते हैं। किडनी इंफेक्शन को निम्नलिखित तरीकों से बचा जा सकता है।

  • बहुत सारा पानी पियें। 
  • सेक्स के बाद यूरीन पास करें। 
  • जन्म नियंत्रण विधियों का सोच समझकर चुनाव करें। 
  • अपने जेनिटल्स को आगे से पीछे की तरफ तक पोंछें। 
  • जब भी आपको लगे तो यूरिन पास करें न कि उसे रोकें ।
  • अपने जननांगों को हर दिन धोएं, और यदि संभव हो तो यौन संबंध बनाने से पहले। 
  • कब्ज का इलाज करवाएं- कब्ज होने से यूटीआई विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।

किडनी इन्फेक्शन में क्या खाना चाहिए?

अपने आहार में कोई भी सप्लीमेंट शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। मूत्र पथ के संक्रमण से जल्दी ठीक होने के लिए, निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं:-

जामुन: शोध से पता चला है कि जामुन में पाया जाने वाला प्रोएन्थोसाइनिडिन, संक्रमण पैदा करने वाले कीटाणुओं को मूत्र पथ की लेयर पर आने से रोक सकता है।

प्रोबायोटिक्स में उच्च खाद्य पदार्थ: संक्रमण से लड़ने में मदद के लिए लाभकारी बैक्टीरिया से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे अचार, सॉकरौट, सादा दही इत्यादि।

उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ: केले, बीन्स, दालें, बादाम, जई और अन्य साबुत अनाज उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों के उदाहरण हैं जो शरीर से अवांछित कीटाणुओं को हटाने में सहायता कर सकते हैं।

सैमन: ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो ठंडे पानी की मछली में पाया जाता है, यूटीआई के कारण होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। जो लोग मछली नहीं खाते, उनके लिए मछली के तेल की गोलियाँ एक अच्छा विकल्प हैं।


किडनी इन्फेक्शन में क्या नहीं खाना चाहिए?

अपने आहार में केवल नए खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों को शामिल करने के अलावा, यूटीआई से रिकवर होने के लिए आहार में कुछ वस्तुओं से परहेज करना भी शामिल है। अगर आपको यूटीआई है तो मीठे से दूर रहें। आजकल, बड़ी संख्या में व्यावसायिक खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में चीनी शामिल है। अफसोस की बात है कि इससे संक्रमण कि स्थिति और भी बिगड़ सकती है। इन मीठे व्यंजनों का सेवन कम करने से यूटीआई उपचार में सहायता मिलेगी। कुछ खाद्य पदार्थ जिनसे बचना चाहिए:

  • मीठे खाद्य पदार्थ: शुगर, कार्बोहाइड्रेट, सोडा, अल्कोहल (शराब), और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स 
  • मसालेदार व्यंजन:  कुछ मसालेदार भोजन से मूत्राशय में जलन हो सकती है।
  • खट्टे फल: कुछ फल बहुत एसिडिक होते हैं, जैसे संतरे, नींबू, मौसमी और अंगूर। विटामिन सी से भरपूर होने के बावजूद(जो प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं), ये मूत्राशय में जलन पैदा कर सकते हैं और यूटीआई के लक्षणों को खराब कर सकते हैं।
  • कैफीन युक्त पेय पदार्थ: जब आपको यूटीआई हो, तो बहुत सारा पानी पीना ज़रूरी है, लेकिन कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय से बचें।

किडनी की सूजन को कम कैसे करें?

किडनी में मूत्र जमा होने के कारण किडनी में होने वाली सूजन को हाइड्रोनफ्रोसिस कहा जाता है। इसका कारण है: ट्यूब(यूरेटर-जो मूत्र को किडनी से ब्लैडर तक ले जाती है) के ऊपरी सिरे पर यूरीन के प्रवाह में आंशिक या पूरी तरह से रुकावट होना। हालाँकि यह कभी-कभी बच्चों में विकसित हो सकता है, नवजात शिशु अक्सर हाइड्रोनफ्रोसिस के साथ पैदा होते हैं। यह सामान्य मूत्र पथ विसंगतियों में से एक है।​

हाइड्रोनफ्रोसिस की समस्या किस कारण से हुई है उसके आधार पर ही उपचार निर्भर करता है। यूरेटेरोपेल्विक जंक्शन (यूपीजे) वाले बच्चों में, यदि हाइड्रोनफ्रोसिस की वजह से किडनी पर दबाव पड़ता है तो पाइलोप्लास्टी आवश्यक हो सकती है। हालाँकि यह एक बड़ी प्रक्रिया है, जटिलताओं की संभावना आमतौर पर काफी कम होती है और सही होने की दर बहुत अधिक होती है।

वयस्कों के लिए इस समस्या के कुछ उपचार में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • किडनी में जमा अतिरिक्त यूरीन को बाहर निकालना
  • रुकावट हटाना
  • मूत्र पथ के संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स
  • अतिरिक्त यूरिक एसिड को बनने से रोकने के लिए दवाएं
  • मूत्र निकालने के लिए मूत्राशय कैथेटर
  • नेफ्रोस्टॉमी(किडनी से मूत्र निकालने के लिए मिडसेक्शन में एक ट्यूब डालना)
  • किसी रुकावट को दूर करने के लिए सर्जरी
  • किडनी का एक भाग या पूरा भाग निकालने के लिए सर्जरी

किडनी इन्फेक्शन के लिए टेस्ट कौन से हैं?

किडनी इन्फेक्शन की समस्या का निदान करने के लिए, आपका डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षणों का उपयोग कर सकता है:

यूरिनालिसिस: संक्रमण के लक्षण देखने के लिए आपके यूरिन सैंपल का टेस्ट किया जाएगा।

यूरिन कल्चर: यूरिन कल्चर में, यूरिन में बैक्टीरिया कुछ ही दिनों में कल्चर डिश पर विकसित हो सकते हैं।

वॉयडिंग सिस्टोयूरेथ्रोग्राम (वीसीयूजी): यह मूत्राशय(ब्लैडर) और मूत्रमार्ग(यूरेथ्रा) की एक एक्स-रे इमेज होती है जो मूत्राशय के भरे होने और पेशाब करते समय ली जाती है।

डिजिटल रेक्टल टेस्ट (डीआरई): डीआरई प्रोस्टेट की एक शारीरिक टेस्ट है।

ब्लड कल्चर: ब्लड कल्चर से यह पता चल सकता है कि आपका संक्रमण आपके रक्त में फैल गया है या नहीं। 

आपका मेडिकल इतिहास: आपसे आपके लक्षणों के बारे में कि यह कब शुरू हुए, और आपके सामान्य स्वास्थ्य इतिहास के बारे में प्रश्न पूछे जाएंगे।

बॉडी टेस्ट: ब्लड और यूरिन सैंपल को एकत्र करने के लिए सामान्य हेल्थ टेस्ट किया जाएगा। दर्द या कोमलता की जाँच के लिए डॉक्टर संभवतः आपके पेट पर दबाव डालेंगे। 

सीटी स्कैन: किडनी संक्रमण का निदान करने के लिए सीटी स्कैन आवश्यक नहीं है, लेकिन यह मूत्र पथ और किडनी की डिटेल्ड 3डी इमेजे दिखाता है जिससे समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। 

किडनी अल्ट्रासाउंड: अल्ट्रासाउंड से किडनियों और यूरेटर्स की इमेजे बनाकर यह पता चल सकता है कि क्या वहां घाव, पथरी या अन्य चीजें हैं जो मूत्र पथ को अवरुद्ध करती हैं।

डिमरकैप्टोसुकिनिक एसिड (डीएमएसए) सिंटिग्राफी: इस परीक्षण में रेडियोएक्टिव पदार्थ की थोड़ी मात्रा का उपयोग किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम करती हैं।