गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

डायलिसिस क्या होता है और कैसे होता है?

 डायलिसिस एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें मशीन या विशेष तरीके से खून (ब्लड) को साफ किया जाता है, जब किडनी ठीक से काम नहीं करती।

🧠 आसान भाषा में समझें:

हमारी किडनी (गुर्दे) शरीर से गंदगी (waste), ज़हरीले पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है।
जब किडनी खराब हो जाती है या काम करना बंद कर देती है, तब डायलिसिस की जरूरत पड़ती है।



⚙️ डायलिसिस कैसे होता है?

डायलिसिस मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है:

1. हेमोडायलिसिस (Hemodialysis)

  • इसमें खून को शरीर से बाहर निकाला जाता है
  • एक मशीन (dialysis machine) खून को साफ करती है
  • साफ खून वापस शरीर में डाल दिया जाता है
  • यह आमतौर पर हफ्ते में 2–3 बार अस्पताल या डायलिसिस सेंटर में किया जाता है

👉 इसमें हर बार 3–5 घंटे लग सकते हैं


2. पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis)

  • इसमें पेट (abdomen) के अंदर एक खास द्रव (fluid) डाला जाता है
  • यह द्रव शरीर के अंदर ही खून से गंदगी खींच लेता है
  • फिर उस द्रव को बाहर निकाल दिया जाता है
  • इसे घर पर भी किया जा सकता है


❗ कब जरूरत पड़ती है?

जब किसी को

  • Kidney Failure हो
  • या किडनी बहुत ज्यादा कमजोर हो जाए

⚠️ ध्यान देने वाली बात:

  • डायलिसिस इलाज नहीं है, यह केवल किडनी का काम अस्थायी रूप से करता है
  • कुछ मरीजों को आगे चलकर किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है

सोमवार, 30 मार्च 2026

किडनी की देखभाल कैसे करे

 किडनी हमारे शरीर का वह फिल्टर है जो खून से गंदगी साफ करने और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किडनी का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।



किडनी को स्वस्थ रखने के कुछ मुख्य तरीके यहाँ दिए गए हैं:

1. हाइड्रेटेड रहें (पानी का सही सेवन)

दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना किडनी के लिए सबसे जरूरी है। यह शरीर से सोडियम और टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने में मदद करता है। हालांकि, बहुत अधिक पानी भी न पिएं; शरीर की जरूरत के हिसाब से 2 से 3 लीटर पानी पर्याप्त है।

2. आहार में बदलाव

  • नमक कम करें: ज्यादा नमक (सोडियम) ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जो किडनी पर दबाव डालता है।

  • प्रोसेस्ड फूड से बचें: पैकेट बंद खाना और जंक फूड में फास्फोरस और सोडियम अधिक होता है, जो किडनी के लिए हानिकारक है।

  • ताजे फल और सब्जियां: सेब, ब्लूबेरी, मछली और फूलगोभी जैसी चीजें किडनी के लिए अच्छी मानी जाती हैं।

3. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

  • शुगर (Diabetes): अगर आपको मधुमेह है, तो उसे नियंत्रित रखें। किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण हाई शुगर ही है।

  • ब्लड प्रेशर: हाई बीपी किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है। इसे 120/80 के करीब रखने की कोशिश करें।

4. दवाओं का सावधानी से उपयोग

बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स (Painkillers) जैसे कि इबुप्रोफेन या डिक्लोफेनाक का बार-बार सेवन न करें। ये दवाएं किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती हैं।



5. सक्रिय जीवनशैली

  • व्यायाम: नियमित वॉक, योग या एक्सरसाइज करने से वजन कंट्रोल में रहता है और रक्तचाप सामान्य रहता है।

  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान से किडनी में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे उनके ठीक से काम करने की क्षमता कम हो जाती है।

6. नियमित जांच (Check-up)

अगर आपको हाई बीपी, डायबिटीज या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है, तो साल में कम से कम एक बार KFT (Kidney Function Test) जरूर करवाएं।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

डायलिसिस से होने वाले नुकसान

 डायलिसिस एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, लेकिन चूंकि यह शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग (किडनी) का काम कृत्रिम रूप से करती है, इसलिए इसके कुछ शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभाव (Side effects) हो सकते हैं।

यहाँ डायलिसिस से होने वाले मुख्य नुकसान और समस्याओं की जानकारी दी गई है:



1. शारीरिक दुष्प्रभाव (Physical Side Effects)

डायलिसिस के दौरान शरीर में तरल पदार्थ और खनिजों का स्तर तेजी से बदलता है, जिससे ये समस्याएं हो सकती हैं:

  • लो ब्लड प्रेशर (Hypotension): यह सबसे आम समस्या है। जब शरीर से अतिरिक्त तरल निकाला जाता है, तो रक्तचाप अचानक गिर सकता है, जिससे चक्कर आना या जी मिचलाना महसूस होता है।

  • मांसपेशियों में ऐंठन (Muscle Cramps): पैरों या हाथों में तेज दर्द और ऐंठन हो सकती है, जो अक्सर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन के कारण होती है।

  • थकान और कमजोरी: डायलिसिस की प्रक्रिया शरीर को काफी थका देती है। कई मरीज उपचार के बाद "वॉश आउट" (एकदम ऊर्जा खत्म होना) महसूस करते हैं।

  • त्वचा में खुजली: शरीर में फास्फोरस का स्तर बढ़ने या त्वचा के सूखने के कारण तेज खुजली हो सकती है।

  • एनीमिया (खून की कमी): किडनी 'एरिथ्रोपोइटिन' हार्मोन बनाना बंद कर देती है, जिससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है।

2. संक्रमण का खतरा (Risk of Infection)

जहाँ से खून निकाला और वापस डाला जाता है (जैसे कैथेटर या फिस्टुला), वहां संक्रमण होने का काफी जोखिम रहता है। यदि सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो यह संक्रमण रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल सकता है (Sepsis)।

3. हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं

लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने से हृदय पर दबाव बढ़ता है। इससे हृदय गति का बढ़ना या हृदय की मांसपेशियों का सख्त होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

4. जीवनशैली और मानसिक प्रभाव

  • समय की पाबंदी: हीमोडायलिसिस के लिए हफ्ते में 3 बार, करीब 4-4 घंटे अस्पताल में बिताने पड़ते हैं, जिससे सामान्य दिनचर्या प्रभावित होती है।

  • डिप्रेशन और तनाव: पुरानी बीमारी और बार-बार अस्पताल जाने के कारण कई मरीज मानसिक रूप से परेशान या उदास महसूस करने लगते हैं।

  • खान-पान पर सख्त पाबंदी: पानी की मात्रा, नमक, पोटेशियम और फास्फोरस के सेवन पर कड़ा नियंत्रण रखना पड़ता है।



महत्वपूर्ण बात

हालांकि ये नुकसान डरावने लग सकते हैं, लेकिन किडनी फेलियर की स्थिति में डायलिसिस न करवाना जानलेवा हो सकता है। इनमें से अधिकांश दुष्प्रभावों को सही डाइट, दवाइयों और डॉक्टर की सलाह मानकर नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यदि आपको डायलिसिस के दौरान या बाद में तेज बुखार, कंपकंपी या फिस्टुला वाली जगह पर सूजन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

बुधवार, 28 जनवरी 2026

क्या डायलिसिस बंद हो सकता है?

 हाँ, डायलिसिस बंद हो सकता है, लेकिन यह एक गंभीर निर्णय है जो केवल डॉक्टर और मरीज की आपसी सहमति से, पूरी समझ के साथ लिया जाता है, क्योंकि यह जीवन-रक्षक उपचार है; मरीज किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के बाद डायलिसिस बंद कर सकता है, या जीवन की गुणवत्ता और आराम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अंतिम चरण की देखभाल (पैलिएटिव केयर) के हिस्से के रूप में इसे बंद कर सकता है, जिसके बाद मरीज के पास कुछ दिन या सप्ताह ही बच सकते हैं।


डायलिसिस बंद करने के कारण और स्थितियाँ:

  1. किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट): यह डायलिसिस से पूरी तरह छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है, जिसके बाद व्यक्ति लगभग सामान्य जीवन जी सकता है (दवाओं के साथ)।

  2. जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना: जब डायलिसिस की शारीरिक और मानसिक मांगें भारी हो जाती हैं और मरीज अपने बचे हुए समय को परिवार के साथ बिताना चाहता है, तो आराम पर केंद्रित देखभाल (पैलिएटिव केयर) के लिए डायलिसिस बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।

  3. तीव्र गुर्दा चोट (Acute Kidney Injury): कुछ मामलों में, किडनी की चोट ठीक हो जाती है और मरीज समय पर डायलिसिस बंद कर सकता है।

  4. अन्य गंभीर बीमारियाँ: यदि मरीज को अन्य गंभीर बीमारियाँ हैं और डायलिसिस जीवन बचाने के बजाय केवल मृत्यु को लंबा कर रहा है, तो इसे बंद किया जा सकता है।

क्या होता है जब डायलिसिस बंद हो जाता है (अंतिम चरण की देखभाल):

  • लक्षणों का प्रबंधन: शरीर में तरल पदार्थ जमा होने और विषाक्त पदार्थों के कारण थकान, सांस लेने में तकलीफ और अन्य लक्षण हो सकते हैं, जिनका प्रबंधन दवाओं (जैसे मूत्रवर्धक) से किया जाता है।

  • आराम और देखभाल: इस दौरान पैलिएटिव (प्रशामक) या धर्मशाला (हॉस्पिस) देखभाल प्रदान की जाती है ताकि मरीज आरामदायक और शांत महसूस करे।

  • सीमित समय: डायलिसिस बंद करने के बाद मरीज के पास आमतौर पर कुछ दिन या सप्ताह ही बचते हैं, और यह एक व्यक्तिगत निर्णय होता है।


निष्कर्ष:

डायलिसिस बंद करने का निर्णय एक बहुत ही व्यक्तिगत और कठिन होता है, जिसे डॉक्टर, परिवार और मरीज की सहमति से लिया जाता है, खासकर जब यह जीवन के अंतिम चरण में होता है या प्रत्यारोपण संभव हो।


मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

घर पर किडनी की सेहत कैसे चेक करें?

 किडनी की सेहत की जांच घर पर पूरी तरह से लैब टेस्ट की तरह तो नहीं की जा सकती, लेकिन कुछ शारीरिक लक्षणों और होम टेस्टिंग किट्स की मदद से आप इसकी स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

यहाँ कुछ आसान तरीके दिए गए हैं जिनसे आप घर पर अपनी किडनी की सेहत पर नज़र रख सकते हैं:


1. पेशाब में बदलाव (Urine Observation)

किडनी की खराबी का सबसे पहला संकेत पेशाब में दिखता है:

  • झाग आना: अगर पेशाब में साबुन के झाग जैसा बहुत ज्यादा झाग बन रहा है, तो यह पेशाब में प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) लीक होने का संकेत हो सकता है।

  • रंग में बदलाव: गहरा पीला, लाल या कोला (भूरा) जैसा रंग खून या इन्फेक्शन की ओर इशारा करता है।

  • बार-बार जाना: खास तौर पर रात के समय बार-बार पेशाब आने की ज़रूरत महसूस होना।

2. शारीरिक संकेतों को पहचानें

  • सूजन (Edema): अगर आपके पैरों, टखनों (ankles) या आंखों के नीचे सुबह के वक्त सूजन दिखाई देती है, तो इसका मतलब है कि किडनी शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी बाहर नहीं निकाल पा रही है।

  • त्वचा में खुजली और सूखापन: खून में टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) जमा होने पर त्वचा में बेवजह खुजली और सूखापन हो सकता है।

  • जल्दी थकान होना: किडनी 'एरिथ्रोपोएटिन' हार्मोन बनाती है जो खून बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से थकान और कमजोरी महसूस होती है।


3. होम टेस्टिंग किट्स (Home Test Kits)

अब बाजार में ऐसी 'यूरिन टेस्ट किट्स' (जैसे Neodocs या GetTested) उपलब्ध हैं जिनसे आप घर बैठे जांच कर सकते हैं।

  • इनमें एक स्ट्रिप (Strip) होती है जिसे पेशाब के सैंपल में डुबाना होता है।

  • यह स्ट्रिप प्रोटीन, क्रिएटिनिन और ग्लूकोज जैसे लेवल चेक करती है।

  • स्मार्टफोन ऐप के जरिए आप तुरंत रिजल्ट देख सकते हैं।

4. बीपी और शुगर की जांच

अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, तो आप रिस्क जोन में हैं। घर पर नियमित रूप से इनका लेवल चेक करें, क्योंकि ये दोनों बीमारियां किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण हैं।


जरूरी सूचना: ये घर पर किए जाने वाले टेस्ट केवल शुरुआती संकेत दे सकते हैं। यदि आपको कोई गंभीर लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से मिलकर KFT (Kidney Function Test) जरूर करवाएं, जिसमें सीरम क्रिएटिनिन और GFR की सटीक जांच होती है।




जीवनशैली और खानपान
  1. हाइड्रेटेड रहें
    दिन भर में 8-10 गिलास पानी पिएं (पेशाब का रंग हल्का पीला होना चाहिए), यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, पर ज्यादा पानी की जरूरत व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करती है. 
  2. नमक कम करें
    प्रोसेस्ड और पैकेट वाले खाने से बचें, क्योंकि इनमें सोडियम (नमक) ज्यादा होता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी को नुकसान पहुंचाता है.
  3. स्वस्थ आहार
    ताजे फल, सब्जियां खाएं और कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन का संतुलन बनाए रखें; फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स से बचें. 
  4. वजन कंट्रोल करें
    सामान्य वजन बनाए रखें, क्योंकि मोटापा किडनी पर दबाव डालता है. 
  5. धूम्रपान और शराब छोड़ें
    ये दोनों किडनी के लिए बहुत हानिकारक हैं, इनसे पूरी तरह बचें. 
  6. पेनकिलर से बचें
    बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा (पेनकिलर) न लें, ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. 

रविवार, 23 नवंबर 2025

किडनी खराब होने पर कहाँ दर्द होता है?

 गुर्दे (Kidney) खराब होने पर दर्द आमतौर पर इन जगहों पर महसूस हो सकता है, हालांकि यह दर्द का एक लक्षण मात्र है, किडनी खराब होने के और भी कई लक्षण होते हैं:

  • पीठ का निचला हिस्सा (Lower Back): किडनी रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों के नीचे स्थित होती हैं। इसलिए दर्द अक्सर पीठ के निचले हिस्से या बगल (Flank) में महसूस होता है।

  • पसलियों के नीचे: दर्द रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों के ठीक नीचे महसूस हो सकता है। यह दर्द सामान्य पीठ दर्द से गहरा और ऊपर की तरफ हो सकता है।

  • पेट: कभी-कभी यह दर्द पेट के मध्य या ऊपरी हिस्से में भी फैल सकता है।

  • कमर या जांघ: किडनी की पथरी या संक्रमण जैसी समस्याओं में दर्द कमर या जांघों के भीतरी हिस्से तक भी फैल सकता है।



⚠️ महत्वपूर्ण सूचना:

किडनी की समस्या का दर्द आमतौर पर एक तरफ (दाएं या बाएं) होता है, लेकिन कभी-कभी दोनों तरफ भी हो सकता है। यह दर्द हल्का, तेज, या ऐंठन जैसा हो सकता है और धीरे-धीरे बढ़ सकता है।


किडनी खराब होने के अन्य सामान्य लक्षण:

दर्द के अलावा, किडनी खराब होने पर ये अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:

  • पेशाब में बदलाव:

    • पेशाब की मात्रा कम होना या बहुत ज़्यादा होना।

    • पेशाब में खून आना, झाग आना, या रंग बदल जाना।

    • पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होना।

  • सूजन (Edema): पैरों, टखनों, पंजों और चेहरे पर सूजन आना, क्योंकि शरीर से अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट बाहर नहीं निकल पाते।

  • थकान और कमजोरी: हर समय थकावट महसूस होना।

  • मतली और उल्टी: जी मिचलाना और उल्टी होना।

  • खुजली: त्वचा पर खुजली या चकत्ते।

  • भूख कम लगना और मुँह का स्वाद खराब होना।

  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को नियंत्रित करना मुश्किल होना।

अगर आपको या आपके किसी परिचित को इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है। सही निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।


कैसे पता करें कि आपको गुर्दे में दर्द है?

आमतौर पर, किडनी दर्द एक या दोनों गुर्दों में होने वाला लगातार होने वाला हल्का दर्द होता है। 

आम तौर पर, दर्द एक किडनी में होता है। अगर यह स्थिति दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करती है, तो आपको दोनों तरफ दर्द महसूस होता है। 

गुर्दे में दर्द के साथ निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:

  • उस क्षेत्र में लगातार और धीमा दर्द 
  • आपके मूत्र में रक्त 
  • धुंधला पेशाब 
  • बुखार और ठंड लगना
  • लगातार पेशाब आना
  • मतली 
  • उल्टी
  • लहरों के रूप में होने वाला तीव्र दर्द
  • दर्द जो कमर तक फैल जाता है 
  • पसलियों के नीचे दर्द 
  • पेशाब के दौरान दर्द या जलन

गुर्दे में दर्द का क्या कारण है?

किडनी में दर्द के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। वे मूत्र प्रणाली से जुड़े भागों जैसे मूत्रवाहिनी और मूत्राशय से जुड़े हो सकते हैं। हालाँकि, पथरीकिडनी में संक्रमण और किडनी कैंसर किडनी में दर्द के कुछ प्रमुख कारण हैं। किडनी में दर्द के संभावित कारण इस प्रकार हैं: 

  • गुर्दे से रक्तस्राव या रक्तस्राव  
  • गुर्दे की नसों या वृक्क शिरा में रक्त के थक्के घनास्त्रता 
  • गुर्दे का ट्यूमर या कैंसर 
  • पत्थर 
  • अल्सर 
  • गुर्दे के संक्रमण जैसे कि पायलोनेफ्राइटिस 
  • hydronephrosis या गुर्दे में सूजन 
  • पॉलीसिस्टिक किडनी रोग  
  • गुर्दे में द्रव्यमान 
  • गुर्दे की चोट  

किसी भी उपचार विकल्प को चुनने से पहले, इसका कारण जानना महत्वपूर्ण है। 

डॉक्टर को कब देखना है?

किडनी में दर्द एक गंभीर स्वास्थ्य जटिलता का संकेत हो सकता है। अगर आपको एक या दोनों किडनी में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो तो उसी दिन अपॉइंटमेंट बुक करें: 

  • लगातार और सुस्त दर्द
  • एक या दोनों तरफ दर्द 
  • बुखार 
  • शरीर में दर्द और थकान  
  • हाल ही में मूत्र मार्ग में संक्रमण 
  • अचानक गुर्दे में दर्द 
  • मूत्र में रक्त 

जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से परामर्श करें ताकि आगे की जटिलताओं से पहले आपकी उपचार योजना शुरू की जा सके।


शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

मैं कैसे चेक करूं कि मेरी किडनी ठीक है या नहीं?

यह जांचने के लिए कि आपकी किडनी ठीक है या नहीं, आप अपने डॉक्टर से रक्त और मूत्र परीक्षण करवा सकते हैं, जैसे कि सीरम क्रिएटिनिन और यूरिन रूटीन टेस्ट। यदि आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, या किडनी की समस्याओं का पारिवारिक इतिहास है, तो नियमित रूप से इन परीक्षणों को करवाना महत्वपूर्ण है। अल्ट्रासाउंड से किडनी के आकार और संरचना का भी पता लगाया जा सकता है। 


जांच के तरीके
  • रक्त परीक्षण:
    • सीरम क्रिएटिनिन: यह आपके रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर को मापता है, जो किडनी की कार्यक्षमता का एक मुख्य संकेतक है।
    • ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN): यह परीक्षण रक्त में यूरिया नाइट्रोजन की मात्रा को मापता है, जो किडनी के ठीक से काम न करने पर बढ़ जाती है।
    • ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर (eGFR): यह एक अनुमानित परीक्षण है जो रक्त परीक्षण के परिणामों के आधार पर आपकी किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करता है।
  • मूत्र परीक्षण:
    • यूरिन रूटीन और माइक्रोस्कोपी: यह पेशाब में प्रोटीन, रक्त और संक्रमण जैसे असामान्यताओं की जांच करता है, जो किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।
    • मूत्र एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात (UACR): यह मूत्र में एल्ब्यूमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) और क्रिएटिनिन के अनुपात को मापता है, जो किडनी की क्षति का शुरुआती संकेत दे सकता है।
  • अन्य परीक्षण:
    • अल्ट्रासाउंड: यह किडनी के आकार, संरचना और किसी भी रुकावट, जैसे पथरी, की पहचान करने में मदद करता है। 
डॉक्टर से कब संपर्क करें
  • यदि आपको लगातार निम्नलिखित में से कोई लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से मिलें:
    • आंखों के नीचे सूजन
    • त्वचा पर खुजली
    • पेशाब की आवृत्ति या रंग में बदलाव (जैसे कि रात में पेशाब करने के लिए उठना, या मूत्र में झाग या रक्त आना)
    • पेशाब में खून आना या रंग का गहरा होना