डायलिसिस एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें मशीन या विशेष तरीके से खून (ब्लड) को साफ किया जाता है, जब किडनी ठीक से काम नहीं करती।
🧠 आसान भाषा में समझें:
हमारी किडनी (गुर्दे) शरीर से गंदगी (waste), ज़हरीले पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है।
जब किडनी खराब हो जाती है या काम करना बंद कर देती है, तब डायलिसिस की जरूरत पड़ती है।
⚙️ डायलिसिस कैसे होता है?
डायलिसिस मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है:
1. हेमोडायलिसिस (Hemodialysis)
- इसमें खून को शरीर से बाहर निकाला जाता है
- एक मशीन (dialysis machine) खून को साफ करती है
- साफ खून वापस शरीर में डाल दिया जाता है
- यह आमतौर पर हफ्ते में 2–3 बार अस्पताल या डायलिसिस सेंटर में किया जाता है
👉 इसमें हर बार 3–5 घंटे लग सकते हैं
2. पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis)
- इसमें पेट (abdomen) के अंदर एक खास द्रव (fluid) डाला जाता है
- यह द्रव शरीर के अंदर ही खून से गंदगी खींच लेता है
- फिर उस द्रव को बाहर निकाल दिया जाता है
-
इसे घर पर भी किया जा सकता है
❗ कब जरूरत पड़ती है?
जब किसी को
- Kidney Failure हो
- या किडनी बहुत ज्यादा कमजोर हो जाए
⚠️ ध्यान देने वाली बात:
- डायलिसिस इलाज नहीं है, यह केवल किडनी का काम अस्थायी रूप से करता है
- कुछ मरीजों को आगे चलकर किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है









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